दादा बना पोता पाया, मेरा बचपन लोट आया,
खुशियों की खिड़की खुली थी कुदरत ने दीप जलाया,
मेरा बचपन लौट आया !
२६ अक्टूबर २००३ ने ज्योंही कदम बढ़ाया,
मेरा पोता आत्रेय मेरे आँगन में आया,
बाग़ बगीचे पवन झरोखे नाच रहे थे सारे मिल के,
मन मयूर भी कूक रहे थे खोल के खिड़की दिल के,
सूरज ने अपनी किरणों से गुलाबी रंग बरषाया,
और फूलों ने अपनी खुशबू खुशी खुशी लुटाया,
चारों दिशा के दिग्पालों को मैंने यही बताया,
दादा बना पोता पाया मेरा बचपन लौट आया !
आज ८ साल का मेरा पोता जन्म दिन मनाएं,
एक साथ मिलकर क्र सारे मधुर गीत सुनाएं,
ऐसा जन्म दिन मनाएं यादगार बन जाए,
हर बच्चे का जन्म दिन फिर सब ऐसे ही मनाएं,
आओ बच्चो हंस लो गालो मंद मंद मुस्कराओ,
मोमबती जल गयी है जोर से ताली बजाओ !
मेरे मन के मंदिर ने भी मुझको याद दिलाया,
दादा बना पोता पाया मेरा बचपन लौट आया !
हरेंद्रसिंह रावत, १६६ ब्रेटल सर्किल
मेलविल न्यू यार्क, अमेरिका २६/१०/२०११