हाँ सचमुच में, जब भी इस महान देश की प्रधान मंत्री की कुर्सी का जिक्र आता है तो सबसे पहले श्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा लगाया गया वह पौधा याद आता है जो उनहोंने १५ अगस्त १९४७ ई० को हिन्दुस्तान पाकिस्तान बनाकर लाखों घर उजाड़ कर, हजारों बेगुनाहों को बेरहम पाकिस्तानियों से मरवाकर संसद भवन में लगाया था ! २६ जनवरी १९५० ई० को जो संविधान बना वह भी इंग्लैण्ड के १९३५ ई० के एक्ट को आधार बनकर बनाया गया ! कहा तो यह गया था की "अब हम आजाद हो गए हैं, सारे हिन्दुस्तानी हर जगह, चाहे वह न्यापालिका हो चाहे कार्यपालिका हो और चाहे हो विधायिका समानता और एक ही नजर से देखें जाएंगे ! हर देश का नागरिक अपनी योग्यता के आधार पर नौकरी पाने का हक़ दार होगा, अमीर गरीब, ऊंचे नीचे, मजदूर मालिक प्रजातांत्रिक, धर्म निरपेक्ष देश में कर्तब्यों का पालन करेंगे और सविधान में दिए गए, शिक्षा का अधिकार, जीने का अधिकार, वोट देने का अधिकार, सांसद और विधायक के लिए चुनाव लड़ने का अधिकार ! समानता का अधिकार, देश के किसी भी भाग में जाकर घूमने फिरने का अधिकार, नौकरी करने का अधिकार का सहभागी बनेंगे ! कल के राजा रजवाड़े, जागीरदार, जमीदार, बड़े बड़े सेठ साहूकार जिन्होंने जिन्दगी भर अंग्रेजों की गुलामी की, स्वतंत्र सेनानियों के स्वतंत्रता आन्दोलन को कुचलने में अंग्रेजों की मदद की और भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव राजगुरु जैसे देश भक्तों को फांसी पर लटक वाया, वही लोग पैसों के बल पर स्वतंत्र देश के शासक बन बैठे ! अंग्रेजों ने कुछ भी तो नहीं छोड़ा था मिट्टी तक वे इंग्लैण्ड ले गए थे ! उलटे गांधी जी के जिद के आगे पाकिस्तान को ५० करोड़ रुपये और दे दिए गए, पाकिस्तान के हुक्म रानों ने इन पैसों से हथियार खरीद कर काश्मीर पर आक्रमण कर दिया ! संयुक्त राष्ट्र के दबाव के कारण भारतीय सैनिकों को युद्ध बंद कर देना पड़ा और पाकिस्तान काश्मीर के एक तिहाई हिस्से पर अपना कब्जा जमा कर बैठ गया ! आज भी इस काश्मीर की सुरक्षा पर देश की आय का एक बहुत बड़ा भाग खर्च किया जा रहा है ! जब भी भारत प्रगति के रास्ते पर बढ़ने की कोशीश करता है, पाकिस्तान अमेरिका से मिले भीख से हथियार खरीदता है और अकारण ही काश्मीर पर या देश की सीमा पर आक्रमण कर देता है !
देश का पहला मंत्रीमंडल बना, जिसमें नेहरू के अलावा, सरकार पटेल, सरदार बलदेवसिंह, कृष्णमाचार्य, मोरारजी देसाई, सुचेता कृपलानी, श्रीमत्ती नायडू, अब्दुल कलाम आजाद रफीक किदवई और भी बहुत सी जानी मानी हस्तियाँ थीं, सारे चरित्रवान, योग्य और जनता के असली रहनुमा थे ! कृष्णा मेनन इंग्लैण्ड में भारतीय दूतावास में सर्वे सर्वा था, उन्हीं दिनों भारतीय रक्षा मंत्रालय ने इंग्लैण्ड से सैनिकों के लिए दुर्गम घाटियों में चलने वाली विशेष जीप- जोंगे मंगाए, उनकी खरीद फरोक्त में भी कमीशन लिया गया, देश का सबसे पहला भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ, लेकिन मामला तूल पकड़ने से पहले ही दबा दिया गया ! वे सारे जीप जोंगे कबाड़ खाने में गए ! फिर कांग्रेसियों में नेहरू के बाद इन्द्रा जी का नाम भुनाया जाने लगा, लेकिन लाल बहादूर शास्त्री सर्व सम्मति से प्रधान मंत्री बनाए गए ! ताशकंद में ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर होते ही उनकी मृतु हो गयी ! इन्क्वारियाँ हुईं प्रोसीडिंग भी तैयार की गयी लेकिन उसे जग जाहीर नहीं होने दिया, क्या परस्थितियाँ थी, शास्त्री जी के साथ ही मौत के रहस्य भी दफ़न हो गए ! इन्द्रा गांधी जी नेहरू की सुपुत्री को कुर्सी सौंप दी गयी ! उस समय तक देश में कोंई सक्षम विपक्ष नहीं था, इस तरह कांग्रेस जैसा चाहती थी करती थी ! १९८४ ई० में इन्द्राजी के बाद राजीव गांधी, ऐसा नहीं था की कांग्रेस में कोंई राजीव को टक्कर देने वाला नहीं था, लेकिन नेहरू गांधी परिवार के प्रति श्रद्धा और भक्ती, वंश आगे बढ़ता रहा जैसे प्रजातंत्र न होकर यह राजतंत्र हो ! राजीव के बाद फिर सोनिया का नाम जोर शोरों से उछाला जाने लगा, लेकिन समय काफी बदली हो चुका था, किसी भी पार्टी के पास बहुमत न होने से उन्हें बाहर से समर्थन लेना पड़ा, कांग्रेस में ही दरार पद गयी, सरद पंवार, ममता बनर्जी अपनी अपनी पार्टी बनाकर अलग हो गए ! भिन्न भिन्न घटकों द्वारा बना भानमती का कुनवा बन गया ! उनमें से बहुतों ने सोनिया को विदेशी मूल होने के कारण देश का प्रधान मंत्री स्वीकार करने से इनकार कर दिया ! परिवार से अलग हटकर दसरा प्रधान मंत्री नर्सिघा राव बना ! फिर १९९६ से २००४ चार तक विपक्ष सता पर काबिज रहा ! २००४ चार में फिर सहयोगी पार्टी के सर ताज सरद पंवार और दूसरे घटकों ने सोनिया को नकार दिया तो कांग्रेस ने साफ्ट कारनर ढूंढ कर मन मोहनसिंह को प्रधान मंत्री की कुर्सी थमा दी और रिमोट दे दिया सोनिया जी के हाथों में ! सात सालों से लगातार मन मोहनजी आँख मूँद कर कुर्सी का सुख भोग रहे हैं और सता के केंद्र बिंदु से आदेश ले रहे हैं ! सोनिया जी के नव निहाल कांग्रेस के वेताज प्रिंस अब ४१ साल के होगये हैं, अब परिवार के खासम ख़ास जैसे, दिग्विजयसिंह जी को फिर खाज उठने लगी है अब वे कहते फिर रहे हैं " राहुल को अब प्रधान मंत्री का तख्ते ताउस संभाल लेना चाहिए, वे सब गु न समपन्न हैं ! " उनके चमचों में कुछ ऐसे भी हैं जो कहते हैं "की प्रियंका जी को भी आगे लाओ और समय पड़ने पर उन्हें भी गद्दी पर बिठाओ " ! देखना है प्रजातांत्रिक देश में ऊँट किस करवट बैठता है ! ये कैसा प्रजातंत्र है ? अध्ययन मनन करने की जरूरत है ! आखीर होगा वही जो राम रची राखा !
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